जो ऊपर की ओर जाती हैं,
वही सीढियां नीचे भी आती हैं.
और सीढियां चढ़ने-उतरने की
कई विधाएं भी पायी जाती हैं!
कुछ लोग एक-एक कदम बढ़ाते हैं,
कुछ लोग बस फांदते ही जाते हैं.
और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो
हर सीढ़ी पर दोनों कदम जमाते हैं.
और वैसे ही उतरना भी कला है.
धीरे-धीरे उतरना बेहतर होता है,
क्यूंकि जल्दी-जल्दी उतरने में
लड़खड़ाने का ख़तरा ज्यादा होता है.
बात तो बस रिस्क की है,
कौन कितना उठा पाता है.
जो जितना रिस्क उठाता है
वो उतना ही बढ़ता जाता है.
लेकिन चढ़ने और उतरने के क्रम में
एक विशेष अंतर होता है,
कि कूदकर उतरना तो आसान होता है
मगर उछलकर चढ़ पाना-
ज़रा मुश्किल होता है !
Picture Courtesy: http://wellness-nexus.blogspot.com/2012/03/climb-steers-of-success.html


